लोगों की राय

बी ए - एम ए >> बीए सेमेस्टर-3 मनोविज्ञान

बीए सेमेस्टर-3 मनोविज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :160
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2647
आईएसबीएन :0

Like this Hindi book 0

बीए सेमेस्टर-3 मनोविज्ञान सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- अभिवृत्ति निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए अभिवृत्ति में परिवर्तन लाने के उपायों का वर्णन कीजिए।

सम्बन्धित लघु प्रश्न
1. अभिवृत्तियों का निर्माण कैसे होता है?
2. उन कारकों की विवेचना कीजिए जो मनोवृत्तियों के निर्माण में योगदान करते हैं।
3. अभिवृत्तियाँ कैसे बनती हैं?
4. अभिवृत्ति में परिवर्तन लाने के कुछ उपायों का वर्णन कीजिये।
5. मनोवृत्तियाँ किन परिस्थितियों में बदलती हैं? वर्णन कीजिए।

उत्तर -

अभिवृत्ति एक अर्जित प्रक्रिया है। इसके विकास तथा निर्माण में अनेक कारकों का प्रभाव पड़ता है। समाज मनोवैज्ञानिकों ने इसके विकास तथा निर्माण के संबंध में अनेक प्रयोग किये हैं।

अभिवृत्ति के विकास तथा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक
(Factors Affecting Development and Formation of Attitude)

अभिवृत्ति के विकास तथा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-

1. आवश्यकता पूर्ति (Want Satisfaction) - जिस व्यक्ति, वस्तु या घटना से हमारी आवश्यकता की पूर्ति होती है अर्थात् हमारे लक्ष्य की प्राप्ति होती है उसके प्रति हमारी अनुकूल मनोवृत्ति विकसित हो जाती है।

2. सूचनाएं (Information ) - अभिवृत्ति के निर्माण में प्राप्त सूचनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमें ये सूचनाएं रेडियो, टेलीवीजन, अखबार, पत्रिकाओं आदि के माध्यम से प्राप्त होती हैं।

3. रूढ़ियुक्तियाँ (Stereotypes ) - रूढ़ियुक्तियों से तात्पर्य किसी वर्ग या समुदाय के विषय में सामान्यीकृत प्रत्याशाओं से होता है। जैसे हिन्दू समाज में एक रूढ़ियुक्ति है कि गाय हमारी माता है, इसलिये हिन्दू समाज में मुस्लिम समाज की अपेक्षा गाय के प्रति एक अनुकूल अभिवृत्ति का निर्माण होगा। इसी प्रकार अनेक रूढ़ियुक्तियाँ अभिवृत्ति के विकास तथा निर्माण को प्रभावित करती हैं।

4. समूह ( Group) - दो प्रकार के समूह मनोवृत्ति निर्माण को प्रभावित करते हैं -

(i) प्राथमिक समूह (Primary Group) - प्राथमिक समूह वह समूह होता है जिसमें सदस्यों की संख्या प्रायः कम होती है और सदस्यों के बीच घनिष्ठ संबंध होता है जैसे परिवार में जिन व्यक्तियों एवं घटनाओं के प्रति माता-पिता की अभिवृत्ति अनुकूल होगी, प्रायः बच्चों की भी उस विषय में अनुकूल अभिवृत्ति होती है।

(ii) संदर्भ समूह (Reference Group) - संदर्भ समूह का आशय वैसे समूह से है जिससे व्यक्ति आत्मीकरण कर लेता है चाहे वह उसका सदस्य हो या न हो।

5. व्यक्तित्व (Personality ) - अभिवृत्ति के निर्माण एवं उसके विकास में व्यक्तित्व शीलगुणों का महत्वपूर्ण योगदान है। व्यक्ति उन अभिवृत्तियों को जल्दी सीख लेता है जो उसके व्यक्तित्व शीलगुणों के अनुकूल होती हैं।

6. सांस्कृतिक कारक (Cultural Factors) - अभिवृत्तियों के निर्माण में सांस्कृतिक कारकों का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रत्येक संस्कृति के अपने मूल्य, परम्पराएं एवं धर्म आदि होते हैं।

अभिवृत्ति परिवर्तन
(Attitude Change)

अभिवृत्तियाँ अर्जित होती हैं। अतः उचित परिस्थितियाँ उत्पन्न कर उसमें परिवर्तन किया जा सकता है, परन्तु कभी-कभी परिवर्तन कठिन होता है जैसे अनुकूल अभिवृत्ति को प्रतिकूल या प्रतिकूल अभिवृत्ति को अनुकूल बनाना कठिन होता है।

अभिवृत्ति परिवर्तन को निम्नलिखित दो भागों में विभक्त कर सकते हैं

1. अनुकूल परिवर्तन (Congruent Change) - इसे संगत परिवर्तन भी कहते हैं जैसे किसी एक व्यक्ति की अभिवृत्ति किसी व्यक्ति या घटना के प्रति अनुकूल से परिवर्तित होकर अधिक अनुकूल हो जाती है एवं किसी एक व्यक्ति की अभिवृत्ति किसी घटना या वस्तु के प्रति प्रतिकूल से और प्रतिकूल हो जाती है।

2647_01_41

2. प्रतिकूल परिवर्तन (Incongruent Change) - इसे असंगत परिवर्तन भी कहते हैं। इसमें अभिवृत्ति अनुकूल से बदलकर प्रतिकूल या प्रतिकूल से दलकर अनुकूल में परिवर्तन हो जाती है अर्थात् असंगत परिवर्तन में अभिवृत्ति की दिशा बदल जाती है। अभिवृत्ति परिवर्तन से तात्पर्य इन दोनों या दोनों में एक प्रकार का परिवर्तन होता है।

प्रायः प्रतिकूल परिवर्तन की तुलना में अनुकूल परिवर्तन सरलता से होता है और अधिक प्रबल, संगत तथा महत्वपूर्ण अभिवृत्तियों में अनुकूल परिवर्तन प्रतिकूल परिवर्तन की अपेक्षा सरल होता है।

अभिवृत्ति परिवर्तन के निर्धारक
(Determinants of Attitude Change)

अभिवृत्ति परिवर्तन कई कारकों से प्रभावित होता है। ऐसे प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं-

1. जन-संचार के साधन (Means of Mass Communication) - व्यक्तियों में अभिवृत्ति परिवर्तन की क्रिया में जन-संचार के साधनों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस विषय में शेरिफ तथा शेरिफ (Sherif and Sherif) ने कहा है कि आज के अत्यधिक जटिल समाजों में व्यक्ति और समूह दोनों ही सम्प्रेषण की विभिन्न विधियों द्वारा अपनी अभिवृत्तियों के निर्माण का प्रयत्न करते हैं।

2. सम्पर्क द्वारा परिवर्तन (Change by Contact)  अभिवृत्ति परिवर्तन सम्पर्क द्वारा प्रभावित होता है। जिन व्यक्तियों में घनिष्ठ सम्पर्क होता है उनकी अभिवृत्तियाँ परिवर्तित हो जाती हैं। जिन लोगों में परस्पर सम्पर्क होता है उनकी अभिवृत्तियों में समानता पायी जाती है। यह समानता अभिवृत्तियों को सम्पर्क द्वारा परिवर्तित करती है।

3. स्कूल का प्रभाव (Effect of School) - व्यक्ति की अभिवृत्ति परिवर्तन में स्कूल का प्रभाव भी पड़ता है। अध्यापक तथा साथियों का गम्भीर प्रभाव बालक पर पड़ता है। इन प्रभावों से बच्चों की अभिवृत्तियाँ प्रभावित एवं परिवर्तित होती हैं।

4. समूह के प्रभाव द्वारा परिवर्तन (Change by Group Effect) - व्यक्ति की अभिवृत्तियाँ समूह के प्रभाव द्वारा परिवर्तित हो जाती हैं। समूह के प्रत्येक सदस्य समूह के आदर्शों एवं मूल्यों के अनुसार व्यवहार करते हैं।

5. व्यक्तिगत अनुभव के द्वारा परिवर्तन (Change by Personal Experience) - व्यक्ति के व्यक्तिगत अनुभव का उसकी संबंधित अभिवृत्ति पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रभाव के कारण व्यक्ति की अभिवृत्ति में परिवर्तन होना स्वाभाविक होता है। उदाहरणतया यदि कोई व्यक्ति शराब पीने वाले व्यक्ति की दुर्दशा को देख लेता है तो शराब के प्रति अभिवृत्ति परिवर्तित हो जाती है।

6. संस्कृति द्वारा परिवर्तन (Change by Culture) - व्यक्ति की अभिवृत्ति परिवर्तन में संस्कृति का प्रभाव पड़ता है। धर्म, आचार, प्रथा तथा औद्योगिकी आदि के समग्र रूप को संस्कृति कहते हैं। लिंटन (Linton ) के अनुसार “सम्पूर्ण रूप में, संस्कृति किसी भी समाज के सदस्यों के जीवन के प्रत्येक कार्य अनिवार्यतः पथ-प्रर्दशक का कार्य करती है।"

7. प्रतिष्ठा निर्देश द्वारा परिवर्तन (Change by Prestige Suggestion) - प्रतिष्ठित व्यक्ति के निर्देश द्वारा भी जनसाधारण की अभिवृत्ति परिवर्तित हो जाती है। जब कोई समाज सुधारक किसी विषय पर अपने निर्देश देता है तो उसका प्रभाव सम्बन्धित व्यक्तियों पर पड़ता है। उदाहरण के लिये स्वामी विवेकानन्द के निर्देशों प्रभाव कई लोगों की अभिवृत्ति परिवर्तित हुयी। इसी प्रकार प्रत्येक समाज में प्रतिष्ठित व्यक्तियों के निर्देश का प्रभाव व्यक्तियों के अभिवृत्ति परिवर्तन में होता है 1

अभिवृत्ति परिवर्तन के उपरोक्त निर्धारकों से ज्ञात होता है कि अभिवृत्ति परिवर्तन में कई कारकों की भूमिका होती है जो अभिवृत्ति परिवर्तन को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

    अनुक्रम

  1. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान के कार्यक्षेत्र की व्याख्या करें।
  2. प्रश्न- सामाजिक व्यवहार के स्वरूप की व्याख्या कीजिए।
  3. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान की परिभाषा दीजिए। इसके अध्ययन की दो महत्वपूर्ण विधियों पर प्रकाश डालिए।
  4. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान की प्रयोगात्मक विधि से क्या तात्पर्य है? सामाजिक परिवेश में इस विधि की क्या उपयोगिता है?
  5. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान की निरीक्षण विधि का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये।
  6. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान में सर्वेक्षण विधि के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  7. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान में क्षेत्र अध्ययन विधि से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकार तथा गुण दोषों पर प्रकाश डालिए।
  8. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान को परिभाषित कीजिए। इसकी प्रयोगात्मक तथा अप्रयोगात्मक विधियों की विवेचना कीजिए।
  9. प्रश्न- अन्तर- सांस्कृतिक शोध विधि क्या है? इसके गुण-दोषों का वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान की आधुनिक विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- सामाजिक व्यवहार के अध्ययन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
  12. प्रश्न- समाज मनोविज्ञान के महत्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  13. प्रश्न- अर्ध-प्रयोगात्मक विधि का वर्णन कीजिये।
  14. प्रश्न- क्षेत्र अध्ययन विधि तथा प्रयोगशाला प्रयोग विधि का तुलनात्मक अध्ययन कीजिये।
  15. प्रश्न- समाजमिति विधि के गुण-दोष बताइये।
  16. प्रश्न- निरीक्षण विधि पर टिप्पणी लिखिये।
  17. प्रश्न- व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके स्वरूप को समझाइए।
  18. प्रश्न- प्रभावांकन के साधन की व्याख्या कीजिए तथा यह किस प्रकार व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण में सहायक है? स्पष्ट कीजिए।
  19. प्रश्न- दूसरे व्यक्तियों के बारे में हमारे मूल्यांकन पर उस व्यक्ति के व्यवहार का क्या प्रभाव पड़ता है? स्पष्ट कीजिए
  20. प्रश्न- व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण से आप क्या समझते हैं? यह जन्मजात है या अर्जित? विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- चित्रीकरण करना किसे कहते हैं?
  22. प्रश्न- अवचेतन प्रत्यक्षण किसे कहते हैं?
  23. प्रश्न- सामाजिक प्रत्यक्षण पर संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ता है?
  24. प्रश्न- छवि निर्माण किसे कहते हैं?
  25. प्रश्न- आत्म प्रत्यक्षण किसे कहते हैं?
  26. प्रश्न- व्यक्ति प्रत्यक्षण में प्रत्यक्षणकर्ता के गुणों पर प्रकाश डालिए।
  27. प्रश्न- प्रत्यक्षपरक सुरक्षा किसे कहते हैं?
  28. प्रश्न- सामाजिक अनुभूति क्या है? सामाजिक अनुभूति का विकास कैसे होता है?
  29. प्रश्न- स्कीमा किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है?
  30. प्रश्न- सामाजिक संज्ञानात्मक के तहत स्कीमा निर्धारण की प्रक्रिया कैसी होती है? व्याख्या कीजिए।
  31. प्रश्न- बर्नार्ड वीनर के गुणारोपण सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  32. प्रश्न- केली के सह परिवर्तन गुणारोपण सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  33. प्रश्न- क्या स्कीमा स्मृति को प्रभावित करता है? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
  34. प्रश्न- क्या सामाजिक अनुभूति में सांस्कृतिक मतभेद पाए जाते हैं?
  35. प्रश्न- स्कीम्स (Schemes) तथा स्कीमा (Schema) में क्या अन्तर है? स्पष्ट कीजिए।
  36. प्रश्न- मनोवृत्ति से आप क्या समझते हैं? इसके घटकों को स्पष्ट करते हुए इसकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  37. प्रश्न- अभिवृत्ति निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए अभिवृत्ति में परिवर्तन लाने के उपायों का वर्णन कीजिए।
  38. प्रश्न- मनोवृत्ति परिवर्तन में हाईडर के संतुलन सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  39. प्रश्न- संज्ञानात्मक अंसवादिता से आप क्या समझते हैं? फेसटिंगर ने किस तरह से इसके द्वारा मनोवृत्ति परिवर्तन की व्याख्या की?
  40. प्रश्न- मनोवृत्ति की परिभाषा दीजिए। क्या इसका मापन संभव है? अभिवृत्ति मापन की किसी एक विधि की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- मनोवृत्ति मापन में लिकर्ट विधि का मूल्यांकन कीजिए।
  42. प्रश्न- मनोवृत्ति मापन में बोगार्डस विधि के महत्व का वर्णन कीजिए।
  43. प्रश्न- अभिवृत्ति मापन में शब्दार्थ विभेदक मापनी का वर्णन कीजिए।
  44. प्रश्न- अभिवृत्ति को परिभाषित कीजिए। अभिवृत्ति मापन की विधियों का वर्णन कीजिए।
  45. प्रश्न- मनोवृत्ति को परिभाषित कीजिए। मनोवृत्ति के निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
  46. प्रश्न- अन्तर्वैयक्तिक आकर्षण क्या है? इसके स्वरूप तथा निर्धारकों का वर्णन कीजिए।
  47. प्रश्न- अभिवृत्ति के क्या कार्य हैं? लिखिए।
  48. प्रश्न- अभिवृत्ति और प्रेरणाओं में अन्तर समझाइये।
  49. प्रश्न- अभिवृत्ति मापन की कठिनाइयों का उल्लेख कीजिए।
  50. प्रश्न- थर्स्टन विधि तथा लिकर्ट विधि का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
  51. प्रश्न- उपलब्धि प्रेरक पर प्रकाश डालिए।
  52. प्रश्न- अन्तर्वैयक्तिक आकर्षण में वैयक्तिक कारकों की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- “अन्तर्वैयक्तिक आकर्षण होने का एक मुख्य आधार समानता है।" विवेचना कीजिए।
  54. प्रश्न- आक्रामकता को स्पष्ट कीजिए एवं इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  55. प्रश्न- क्या आक्रामकता जन्मजात होती है? एक उपयुक्त सिद्धान्त द्वारा इसकी आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  56. प्रश्न- कुंठा आक्रामकता सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  57. प्रश्न- क्या आक्रामकता सामाजिक रूप से एक सीखा गया व्यवहार होता है? एक उपयुक्त सिद्धान्त द्वारा इसकी आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  58. प्रश्न- आक्रामकता के प्रमुख सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
  59. प्रश्न- कुंठा-आक्रामकता सिद्धान्त को बताइए।
  60. प्रश्न- आक्रामकता को उकसाने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए। अपने उत्तर के पक्ष में प्रयोगात्मक साक्ष्य भी दें।
  61. प्रश्न- मानवीय आक्रामकता के वैयक्तिक तथा सामाजिक निर्धारकों का वर्णन कीजिए।
  62. प्रश्न- समाजोपकारी व्यवहार का अर्थ और इसके निर्धारकों पर एक निबन्ध लिखिए।
  63. प्रश्न- प्रतिसामाजिक व्यवहार का स्वरूप तथा विशेषताएँ बताइये।
  64. प्रश्न- सहायतापरक व्यवहार के सामाजिक व सांस्कृतिक निर्धारक का वर्णन कीजिए।
  65. प्रश्न- परोपकारी व्यवहार को किस प्रकार उन्नत बनाया जा सकता है?
  66. प्रश्न- सहायतापरक व्यवहार किसे कहते हैं?
  67. प्रश्न- सहायतापरक व्यवहार के निर्धारकों का वर्णन कीजिए।
  68. प्रश्न- अनुरूपता से क्या आशय है? अनुरूपता की प्रमुख विशेषताएँ बताते हुए इसको प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
  69. प्रश्न- अनुरूपता के सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  70. प्रश्न- पूर्वाग्रह की उपयुक्त परिभाषा दीजिये तथा इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। पूर्वाग्रह तथा विभेद में अन्तर बताइये।'
  71. प्रश्न- सामाजिक पूर्वाग्रहों की प्रवृत्ति की संक्षिप्त रूप में विवेचना कीजिए। इसके हानिकारक प्रभावों को किस प्रकार दूर किया जा सकता है? उदाहरण देकर अपने उत्तर की पुष्टि कीजिये।
  72. प्रश्न- पूर्वाग्रह कम करने की तकनीकें बताइए।
  73. प्रश्न- पूर्वाग्रह से आप क्या समझते हैं? इसकी विशेषताओं एवं स्रोतों का वर्णन कीजिए।
  74. प्रश्न- आज्ञापालन (Obedience) पर टिप्पणी लिखिये।
  75. प्रश्न- दर्शक प्रभाव किसे कहते हैं?
  76. प्रश्न- पूर्वाग्रह की प्रकृति एवं इसके संघटकों की विवेचना कीजिए।
  77. प्रश्न- पूर्वाग्रह के प्रमुख प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  78. प्रश्न- पूर्वाग्रह के नकारात्मक प्रभाव का वर्णन कीजिये।
  79. प्रश्न- पूर्वाग्रह के विकास और सम्पोषण में निहित प्रमुख संज्ञानात्मक कारकों का वर्णन कीजिए।
  80. प्रश्न- पूर्वाग्रह एवं विभेदन को कम करने के लिये कुछ कार्यक्रमों की व्याख्या कीजिए।
  81. प्रश्न- समूह समग्रता से आप क्या समझते हैं? समूह समग्रता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिये।
  82. प्रश्न- समूह मानदंड क्या है? यह किस प्रकार से समूह के लिए कार्य करते हैं?
  83. प्रश्न- समूह भूमिका किस प्रकार अपने सदस्यों के लिए कार्य करती है? स्पष्ट कीजिए।
  84. प्रश्न- निवैयक्तिकता से आप क्या समझते हैं? प्रयोगात्मक अध्ययनों से निवैयक्तिकता की प्रक्रिया पर किस तरह का प्रकाश पड़ता है?
  85. प्रश्न- “सामाजिक सरलीकरण समूह प्रभाव का प्रमुख साधन है। व्याख्या कीजिए।
  86. प्रश्न- “निर्वैयक्तिता में व्यक्ति अपनी आत्म- अवगतता खो देता है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  87. प्रश्न- समूह के प्रकार बताइये।
  88. प्रश्न- सामाजिक श्रमावनयन से आप क्या समझते हैं? इसके कारणों का उल्लेख कीजिए और इसे किस तरह से कम किया जा सकता है? विवेचना कीजिए।
  89. प्रश्न- आज्ञापालन (Obedience) पर टिप्पणी लिखिये।
  90. प्रश्न- समूह निर्णय पर टिप्पणी लिखिये।
  91. प्रश्न- सामाजिक श्रमावनयन पर टिप्पणी लिखिये।
  92. प्रश्न- समूह की संरचना पर टिप्पणी लिखिये।

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book